📱 1. योजना का परिचय: PLI-LSEM की समाप्ति के बाद नई MPMS नीति
भारत में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने वाली पूर्ववर्ती योजना (PLI for Large Scale Electronics Manufacturing – PLI-LSEM) की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र की निरंतरता, सप्लाई चेन के सुदृढ़ीकरण और घरेलू वैल्यू एडिशन (Domestic Value Addition) को गहरा करने के लिए नई नीति अधिसूचित की गई है, जिसे Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) नाम दिया गया है।
इस योजना का कुल बजटीय परिव्यय ₹62,500 करोड़ निर्धारित किया गया है। इसे FY 2026-27 से FY 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य देश में मोबाइल फोन उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाना, घरेलू कंपोनेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इस योजना के माध्यम से लगभग ₹39 लाख करोड़ का संचयी (cumulative) उत्पादन और करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार (Direct Jobs) सृजित होने की उम्मीद है।
यह नीति केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया (Make in India): स्वदेशी उत्पादन से बिज़नेस और स्टार्टअप फायदे विजन को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाती है।
⚡ 2. त्वरित तथ्य (Quick Facts: MPMS Overview)
| प्रमुख बिंदु | आधिकारिक विवरण |
| योजना का नाम | मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार |
| कुल बजटीय परिव्यय | ₹62,500 करोड़ |
| प्रभावी अवधि | FY 2026-27 से FY 2030-31 (5 वर्ष) |
| लक्षित श्रेणियां (Target Segments) | TS1 (Mobile Phone Manufacturing) और TS2 (Indian Mobile Phone Brands) |
| मूल इंसेंटिव दरें | TS1: 2.25% से 5% | TS2: 5% (Eligible Sales पर) |
| अतिरिक्त प्रोत्साहन | Indian Design & R&D पर 3% और Domestic Sourcing पर 1.5% तक |
| डोमेस्टिक सोर्सिंग शर्त | पात्र कंपोनेंट्स की कम से कम 25% घरेलू लोकलाइजेशन आवश्यकता |
🏛️ 3. TS1 बनाम TS2: दोनों टारगेट सेगमेंट में क्या अंतर है?
MPMS योजना को विनिर्माण की प्रकृति और उद्योग की संरचना के आधार पर दो स्पष्ट वर्गों में विभाजित किया गया है:
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│ Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) │
│ कुल बजटीय परिव्यय: ₹62,500 करोड़ │
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│
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│ Target Segment 1 (TS1) │ │ Target Segment 2 (TS2) │
│ Mobile Phone Manufacturing │ │ Indian Mobile Phone Brands │
│ • लार्ज-स्केल विनिर्माण व EMS │ │ • स्वदेशी स्वामित्व, IP व डिजाइन │
│ • न्यूनतम टर्नओवर: ₹10,000 करोड़ │ │ • न्यूनतम टर्नओवर: ₹1,000 करोड़ │
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- Target Segment 1 (TS1) – Mobile Phone Manufacturing: यह सेगमेंट बड़े पैमाने पर हैंडसेट उत्पादन करने वाले निर्माताओं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रदाताओं पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन के कुल उत्पादन मूल्य और वैश्विक निर्यात को तेज गति से बढ़ाना है।
- Target Segment 2 (TS2) – Indian Mobile Phone Brands: यह सेगमेंट विशेष रूप से भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल फोन ब्रांड्स को दोबारा सशक्त करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें घरेलू बौद्धिक संपदा (IP), इन-हाउस अनुसंधान और स्थानीय ब्रांडिंग क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष रियायतें (जैसे 1 वर्ष की जेस्टेशन अवधि) और वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं।
🎯 4. योजना के लिए कौन पात्र है? (Eligibility Criteria)
योजना में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के टर्नओवर और परिचालन के आधार पर कड़े मानक तय किए गए हैं:
| मानक (Parameters) | TS1 – Mobile Phone Manufacturing | TS2 – Indian Mobile Brands |
| FY 2025-26 न्यूनतम टर्नओवर | ₹10,000 करोड़ | ₹1,000 करोड़ |
| आवेदक का स्वरूप | भारत में Registered Mobile Phone Manufacturer / EMS | भारत में Registered Mobile Phone Manufacturer / EMS |
| ब्रांड-वाइज गणना | बिक्री और इंसेंटिव ब्रांड-वाइज आधार पर | बिक्री और इंसेंटिव ब्रांड-वाइज आधार पर |
| बिक्री सीमा (Thresholds) | आधार वर्ष (FY 2025-26) से ऊपर वार्षिक वृद्धि शर्तें | योजना के नियमों के अनुसार निर्धारित सीमा |
| योजना अवधि (Tenure) | FY 2026-27 से FY 2030-31 (5 वर्ष) | FY 2026-27 से FY 2030-31 (5 वर्ष) |
नोट: TS1 के मौजूदा ब्रांड्स के लिए आधार वर्ष की बिक्री के ऊपर न्यूनतम वार्षिक बिक्री थ्रेशोल्ड की शर्तें लागू होती हैं, जबकि नए ब्रांड्स के लिए ₹10,000 करोड़ की वार्षिक बिक्री हासिल करने के बाद की शर्तें निर्धारित की गई हैं।
💰 5. वित्तीय प्रोत्साहन कितना मिलेगा? (Incentive Structure)
MPMS के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) की पुरानी दरों (4%–6%) से अलग है। नई योजना के तहत वास्तविक प्रोत्साहन दरें इस प्रकार हैं:
| श्रेणी / इंसेंटिव प्रकार | प्रोत्साहन दर (Incentive Rate) |
| TS1 – Mobile Phone Manufacturing | Eligible Sales पर 2.25% से 5% |
| TS2 – Indian Mobile Brands | Eligible Sales पर 5% |
| Indian Design & R&D इंसेंटिव | TS2 के तहत अतिरिक्त 3% |
| Domestic Sourcing इंसेंटिव | दोनों सेगमेंट के लिए अतिरिक्त 1.5% तक |
इंसेंटिव की गणना कंपनी द्वारा आधार वर्ष की तुलना में की गई वृद्धिशील पात्र बिक्री (Incremental Eligible Sales) पर ब्रांड-वाइज की जाती है।
⚙️ 6. घरेलू सोर्सिंग (Domestic Sourcing) और 25% लोकलाइजेशन की शर्त
भारत में केवल असेंबलिंग करने के बजाय कंपोनेंट स्तर पर वास्तविक वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए सरकार ने अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया है:
- अतिरिक्त 1.5% तक प्रोत्साहन: यदि कोई पात्र कंपनी भारत में बने प्रमुख कंपोनेंट्स और सब-असेंबली (जैसे PCBA, कैमरा मॉड्यूल, बैटरी पैक, डिस्प्ले असेंबली आदि) की घरेलू खरीद करती है, तो उसे 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव मिल सकता है।
- 25% लोकलाइजेशन अनिवार्यता: योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी वित्तीय वर्ष में आवेदक द्वारा निर्मित कुल मोबाइल फोन इकाइयों के कम से कम 25% हिस्से के लिए उन कंपोनेंट्स का घरेलू स्तर पर लोकलाइज्ड होना अनिवार्य है। इस शर्त को पूरा करने पर ही कंपनियां अतिरिक्त सोर्सिंग बोनस के लिए दावा प्रस्तुत कर सकती हैं।
🇮🇳 7. भारतीय ब्रांड्स (TS2) के लिए विशेष कानूनी व तकनीकी शर्तें
Target Segment 2 का लाभ उठाने के लिए किसी भी कंपनी को ‘Indian Brand’ की निम्नलिखित सभी अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी:
- पंजीकरण व निगमन: कंपनी भारत में विधिवत पंजीकृत और निगमित होनी चाहिए।
- शेयरधारिता (Shareholding): कंपनी में 51% से अधिक शेयरधारिता भारतीय नागरिकों के पास होनी चाहिए।
- प्रबंधन नियंत्रण (Management Control): कंपनी का वास्तविक प्रबंधन और प्रशासनिक नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास होना अनिवार्य है।
- बौद्धिक संपदा एवं ट्रेडमार्क (IP & Trademark): ब्रांड का ट्रेडमार्क और पेटेंट/IP अधिकार कानूनी रूप से भारत में धारित (Held within India) होने चाहिए। सरकार इसकी विस्तृत तकनीकी जांच करती है।
- इन-हाउस R&D क्षमताएं: उत्पाद डिजाइन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और अनुसंधान से जुड़ी इन-हाउस सुविधाएं भारत में स्थापित होनी चाहिए।
🔄 8. आवेदन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया (Application & Appraisal)
योजना के तहत आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया MeitY और नियुक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) द्वारा पूरी की जाती है:
- ऑनलाइन आवेदन: MeitY द्वारा अधिसूचित पोर्टल पर आवेदन विंडो खुलने के दौरान पात्र इकाइयों द्वारा ऑनलाइन प्रस्ताव जमा करना।
- कॉर्पोरेट सत्यापन: कंपनी के निगमन विवरण, ऑडिटेड बैलेंस शीट और सक्रिय जीएसटी रजिस्ट्रेशन (GST Registration) का सत्यापन।
- PMA द्वारा स्क्रूटनी: न्यूनतम टर्नओवर, प्लांट व मशीनरी में निवेश और IP अधिकारों की गहन तकनीकी व वित्तीय जांच।
- सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन: सक्षम समिति/मंत्रालय द्वारा पात्रता की पुष्टि के बाद चयनित कंपनियों को स्वीकृति पत्र जारी करना।
- इंसेंटिव क्लेम व वितरण: प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में उत्पादन, बिक्री और घरेलू सोर्सिंग के ऑडिटेड प्रमाण प्रस्तुत करने पर इंसेंटिव का भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाता है।
🏭 9. एमएसएमई और सहायक उद्योगों के लिए अवसर
घरेलू सोर्सिंग की 25% अनिवार्यता से देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए कंपोनेंट निर्माण में नए अवसर खुल रहे हैं:
- स्थानीय कंपोनेंट सप्लाई: प्लास्टिक मोल्डिंग, पैकेजिंग सामग्री, चार्जिंग केबल और कनेक्टर्स की आपूर्ति के लिए एमएसएमई इकाइयों को बड़े ब्रांड्स से सीधे ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ती है।
- MSME प्राथमिकताएं: सहायक विनिर्माण से जुड़ी इकाइयां उद्यम पोर्टल रजिस्ट्रेशन (Udyam Registration): MSME सर्टिफिकेट के फायदे लेकर विभिन्न सरकारी प्राथमिकताओं और संस्थागत ऋण का लाभ उठा सकती हैं।
- नई इकाई की स्थापना: कंपोनेंट सप्लाई चेन में नई यूनिट्स लगाने वाले उद्यमी PMEGP लोन योजना: नए उद्योग हेतु ₹50 लाख तक ऋण अथवा स्टैंड अप इंडिया योजना: विनिर्माण इकाइयों के लिए ₹1 करोड़ तक का बैंक लोन जैसी पहलों का उपयोग कर सकते हैं।
❓ 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत में बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन उत्पादन को बढ़ावा देना, घरेलू वैल्यू एडिशन को मजबूत करना, सप्लाई चेन का विस्तार करना और भारतीय ब्रांड्स को प्रतिस्पर्धी बनाना। सरकार के अनुमान के अनुसार योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है
MPMS का कुल बजट कितना है और यह कब तक लागू रहेगी?
योजना का कुल बजटीय परिव्यय ₹62,500 करोड़ है और यह वित्तीय वर्ष 2026-27 से FY 2030-31 तक 5 वर्षों के लिए लागू की गई है।
क्या पुरानी PLI-LSEM योजना और नई MPMS एक ही हैं?
नहीं। पुरानी PLI-LSEM योजना की समयावधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। MPMS एक नई योजना है, जिसे FY 2026-27 से नए नियमों, अलग इंसेंटिव दरों (2.25% से 5%) और घरेलू सोर्सिंग पर विशेष फोकस के साथ लागू किया गया है।
TS1 और TS2 के लिए न्यूनतम टर्नओवर की क्या शर्त है?
FY 2025-26 में TS1 के लिए आवेदक का न्यूनतम टर्नओवर ₹10,000 करोड़ और TS2 (Indian Brands) के लिए न्यूनतम टर्नओवर ₹1,000 करोड़ होना आवश्यक है।
घरेलू सोर्सिंग पर अतिरिक्त इंसेंटिव के लिए क्या नियम हैं?
घरेलू स्तर पर बने प्रमुख कंपोनेंट्स की खरीद पर 1.5% तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिल सकता है, जिसके लिए कंपोनेंट्स की कम से कम 25% लोकलाइजेशन आवश्यकता को पूरा करना अनिवार्य है।
📝 11. निष्कर्ष (Conclusion)
Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) भारत में मोबाइल विनिर्माण को केवल असेंबली से आगे ले जाकर वास्तविक घटक निर्माण और बौद्धिक संपदा के विकास की दिशा में एक व्यवस्थित नीतिगत कदम है। ₹62,500 करोड़ के आवंटन और स्पष्ट दोहरे लक्ष्य (TS1 एवं TS2) के माध्यम से यह योजना वैश्विक निर्माताओं के साथ-साथ घरेलू ब्रांड्स को भी संतुलित प्रोत्साहन प्रदान करती है। किसी भी विनिर्माता के लिए वास्तविक पात्रता और लाभ योजना की आधिकारिक अधिसूचना व विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार ही तय होंगे।
⚠️ 12. अस्वीकरण एवं आधिकारिक स्रोत (Disclaimer & Official Sources)
अस्वीकरण: LocalYojana.com कोई सरकारी संस्था नहीं है। इस लेख में प्रस्तुत जानकारी सामान्य जन-जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य हेतु आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों और सरकारी अधिसूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। योजना के नियम, टर्नओवर मानदंड, इंसेंटिव की दरें और आवेदन प्रक्रिया सरकार द्वारा समय-समय पर संशोधित की जा सकती हैं। किसी भी व्यावसायिक या निवेश निर्णय से पूर्व संबंधित मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टलों से पुष्टि अवश्य करें।
आधिकारिक संदर्भ:
- प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार: PIB Press Release – MPMS Notification
- नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), नई दिल्ली (
meity.gov.in)