छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) योजना : पूरी जानकारी और आवेदन प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG) एक वरदान साबित हो रहे हैं। अक्सर महिलाओं के मन में इसे लेकर कई सवाल होते हैं, जैसे—क्या इसके लिए दूसरे जिले जाना पड़ेगा? खाता कैसे खुलेगा? और क्या छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह लिए अलग से रजिस्टर बनाने पड़ते हैं?

इस लेख में हम इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप बिना किसी परेशानी के अपना समूह शुरू कर सकें।


छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह सूची (Table of Contents)

1. महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) क्या है?

यह 10 से 20 महिलाओं का एक छोटा समूह होता है, जो आपस में मिलकर बचत करती हैं और स्वरोजगार शुरू करती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह ‘बिहान’ (ग्रामीण) और ‘नुलम’ (शहरी) मिशन के तहत इन समूहों को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण देती है।

सरकार का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को Lakhpati Didi Yojana के तहत साल में कम से कम 1 लाख रुपये कमाने के योग्य बनाना है।


2. क्या रजिस्ट्रेशन के लिए दूसरे जिले जाना पड़ता है?

अक्सर यह अफवाह सुनने में आती है कि समूह के रजिस्ट्रेशन के लिए महिलाओं को अपने जिले (जैसे कोरबा) से बाहर बिलासपुर या रायपुर जाना पड़ता है।

सच्चाई यह है:

  • स्थानीय पंजीकरण: आपको कहीं बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है। सारा काम आपके ब्लॉक (जनपद पंचायत) या नगर निगम कार्यालय में ही हो जाता है। यदि आप ग्रामीण क्षेत्र से हैं, तो स्थानीय स्तर पर अपना निवास प्रमाण पत्र तैयार रखें।
  • बैंक खाता: छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह खाता आपके अपने ही मोहल्ले या नजदीकी बैंक ब्रांच में ही खुलता है।

3. समूह का बैंक खाता और ई-केवाईसी (e-KYC)

समूह का लेनदेन किसी एक महिला के व्यक्तिगत खाते में नहीं होता। इसके लिए समूह के नाम का साझा खाता (Joint Account) खोला जाता है।

बैंक खाता खोलने के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी सदस्यों की ई-केवाईसी (e-KYC) गाइड प्रक्रिया पूरी हो। साथ ही, आप अपने बैंक का आधार बैंक सीडिंग स्टेटस चेक भी जरूर कर लें ताकि सरकारी पैसा सीधे खाते में आ सके।


4. रजिस्टर प्रबंधन: हिसाब-किताब के लिए 5 जरूरी कॉपियां

छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह के सफल संचालन और बैंक लोन पाने के लिए आपको अलग से रजिस्टर बनाने पड़ते हैं:

  1. उपस्थिति एवं कार्यवाही पंजी: बैठक में लिए गए निर्णयों और सदस्यों की हाजिरी के लिए।
  2. बचत एवं ऋण पुस्तिका: हर महिला की बचत और लिए गए लोन का हिसाब रखने के लिए।
  3. रोकड़ बही (Cash Book): समूह के कुल नकद लेनदेन का हिसाब।
  4. व्यक्तिगत पासबुक: हर सदस्य के पास रहने वाली छोटी कॉपी।
  5. आगंतुक पंजी: निरीक्षण पर आने वाले अधिकारियों के फीडबैक के लिए।

5. सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता और लोन

  • रिवॉल्विंग फंड (RF): ₹15,000 से ₹20,000 की शुरुआती मदद।
  • बैंक लोन: समूहों को अब ₹20 लाख तक का ऋण बिना किसी गारंटी के मिल सकता है।
  • बिजनेस लोन: यदि समूह की महिलाएं बड़ा बिजनेस शुरू करना चाहती हैं, तो वे PMEGP लोन योजना के जरिए ₹50 लाख तक के लोन के लिए आवेदन कर सकती हैं।

समूह से जुड़ी महिलाएं छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना का भी लाभ उठा सकती हैं यदि वे उसकी पात्रता पूरी करती हैं।


6. आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

  • सभी सदस्यों का आधार कार्ड (यदि अपडेट न हो, तो आधार कार्ड डाउनलोड और सुधार करा लें)।
  • समूह का प्रस्ताव पत्र (Minutes Book) और लेटर हेड
  • नोट: शुरुआती रजिस्ट्रेशन के लिए एफिडेविट (Affidavit) की जरूरत नहीं होती, केवल एक सादे प्रस्ताव पत्र से काम चल जाता है।

7. आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step) छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह

  1. समूह बनाएं: अपने मोहल्ले की 10-12 महिलाओं को इकट्ठा करें।
  2. कार्यालय संपर्क: ग्रामीण क्षेत्र में ‘जनपद पंचायत’ और शहरी क्षेत्र में ‘नगर निगम’ के आजीविका मिशन विभाग में संपर्क करें।
  3. पंजीकरण: वहां के अधिकारी आपका नाम पोर्टल पर दर्ज करेंगे।
  4. खाता खोलें: अधिकारी से मिले ‘इंट्रोडक्शन लेटर’ को लेकर नजदीकी बैंक में साझा खाता खुलवाएं।

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FAQ: छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह

एक समूह में कम से कम कितनी महिलाओं का होना जरूरी है?

छत्तीसगढ़ में एक सक्रिय स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाने के लिए कम से कम 10 से 12 महिलाओं का होना आवश्यक है। विशेष परिस्थितियों में (जैसे पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्र) यह संख्या 5 भी हो सकती है।

क्या समूह का बैंक खाता खोलने के लिए एफिडेविट (Affidavit) लगता है?

नहीं, सामान्य तौर पर बैंक खाता खोलने के लिए शपथ पत्र की जरूरत नहीं होती। इसके लिए केवल समूह का प्रस्ताव पत्र (Resolution Letter), सदस्यों के आधार कार्ड और फोटो की आवश्यकता पड़ती है।

रिवॉल्विंग फंड (RF) का पैसा वापस करना पड़ता है क्या?

रिवॉल्विंग फंड सरकार की ओर से समूह को दी जाने वाली एक शुरुआती प्रोत्साहन राशि है। इसे सरकार को वापस नहीं करना होता, बल्कि इसका उपयोग समूह के अंदर आंतरिक लेनदेन (Internal Lending) को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

क्या समूह की सदस्य होने के साथ हम ‘महतारी वंदन योजना’ का लाभ ले सकते हैं?

हाँ, यदि आप महतारी वंदन योजना की पात्रता शर्तों (जैसे विवाहित होना, आयु सीमा और आय सीमा) को पूरा करती हैं, तो आप समूह में रहते हुए भी उस योजना का लाभ ले सकती हैं।

समूह के रजिस्टरों में हिसाब-किताब कौन लिखता है?

समूह की किसी एक शिक्षित महिला को ‘बुक कीपर’ (लेखपाल) बनाया जाता है। यदि समूह में कोई शिक्षित नहीं है, तो ‘बिहान’ की बैंक सखी या सक्रिय महिला इसमें मदद करती है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ महिला स्वयं सहायता समूह योजना महिलाओं के लिए अपनी पहचान बनाने का सबसे अच्छा जरिया है। उचित रजिस्टर मेंटेनेंस और नियमित बैठकों से आप न केवल सरकारी फंड पा सकती हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं।

हेल्पलाइन: अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की आधिकारिक वेबसाइट bihan.nic.in पर विजिट करें।

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