ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 1, 2 और 3 क्या हैं? सचिव, सरपंच एवं शासकीय कर्मचारियों की भूमिका, प्रारूप और पूरी जानकारी

भारतीय पंचायती राज व्यवस्था में ‘ग्राम सभा’ को लोकतंत्र की सबसे प्राथमिक और शक्तिशाली इकाई माना जाता है। गाँव के विकास कार्य, बुनियादी सुविधाएं, और किसी भी सरकारी योजना का लाभ सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने के लिए ग्राम सभा की मंजूरी अनिवार्य होती है। इस मंजूरी को लिखित रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया को ही ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप (Gram Sabha Resolution) कहा जाता है।

अक्सर ग्रामीणों, नवनिर्वाचित पंचों या सजग नागरिकों को यह स्पष्ट नहीं होता कि ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप क्या होते हैं और विभिन्न कार्यों के लिए किन प्रारूपों (Formats) का उपयोग किया जाता है। इस लेख में हम ग्राम सभा प्रस्ताव के प्रारूप 1, 2, 3 और इसमें शामिल प्रमुख पदाधिकारियों की कानूनी भूमिका को विस्तार से समझेंगे।

ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप (Gram Sabha Resolution) 2026

विवरणमुख्य बिंदु
दस्तावेज़ का नामग्राम सभा प्रस्ताव / कार्यवृत्त (Resolution Register)
मुख्य उद्देश्यगाँव के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का चयन व अनुमोदन
प्रस्ताव के मुख्य प्रकारप्रारूप 1 (सूचना/एजेंडा), प्रारूप 2 (उपस्थिति/कोरम), प्रारूप 3 (पारित प्रस्ताव)
मुख्य जिम्मेदार अधिकारीग्राम पंचायत सचिव (सचिव) और सरपंच (प्रधान)
वैधतासंबंधित वित्तीय वर्ष या कार्य के पूर्ण होने तक कानूनी रूप से मान्य

📄 ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 1, 2 और 3 क्या हैं?

राजस्व और पंचायती राज नियमों के अनुसार, ग्राम सभा की बैठक को कानूनी रूप से वैध बनाने और उसमें लिए गए निर्णयों को रिकॉर्ड करने के लिए तीन मुख्य प्रारूपों का उपयोग किया जाता है:

1. ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 1: बैठक की सूचना और एजेंडा (Notice & Agenda Form)

यह प्रारूप बैठक शुरू होने से पहले उपयोग किया जाता है। इसके तहत ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम सभा की तिथि, समय, स्थान और चर्चा के मुख्य बिंदुओं (एजेंडा) की लिखित सूचना तैयार की जाती है।

  • क्या दर्ज होता है: बैठक का उद्देश्य (जैसे: मनरेगा कार्य चयन, प्रधानमंत्री आवास योजना लाभार्थी सूची आदि)।
  • नियम: राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह सूचना बैठक से कम से कम 7 से 15 दिन पहले गाँव के सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाई जानी और डोंडी (मुनादी) पिटवाकर दी जानी अनिवार्य है।

2. ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 2: उपस्थिति पंजी और कोरम (Attendance & Quorum Register)

बैठक के दिन इस प्रारूप का उपयोग ग्रामीणों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाता है।

  • क्या दर्ज होता है: उपस्थित ग्रामीणों का नाम, पिता/पति का नाम, वार्ड नंबर, और उनके हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान।
  • कोरम (गणपूर्ति) का नियम: बैठक तभी वैध मानी जाएगी जब गाँव के कुल मतदाताओं का एक निश्चित हिस्सा (आमतौर पर 10% या राज्यों के नियमानुसार, जिसमें महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति की न्यूनतम भागीदारी तय होती है) उपस्थित हो।

3. ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 3: पारित प्रस्ताव और कार्यवृत्त (Resolution & Minutes Copy)

यह ग्राम सभा का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम कानूनी दस्तावेज़ होता है। बैठक में जिन विषयों पर सहमति बनी है, उन्हें इसी प्रारूप में लिखा जाता है।

  • क्या दर्ज होता है: “आज दिनांक… को सरपंच की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव क्रमांक… पारित किया गया कि गाँव में सीसी रोड का निर्माण कराया जाएगा।”
  • प्रमाणिक प्रति: यदि किसी ग्रामीण को इस प्रस्ताव की प्रति चाहिए, तो वह विभाग से इसकी ‘सर्टिफाइड कॉपी’ मांग सकता है, जो कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्य होती है।

⚖️ सरपंच, सचिव और शासकीय कर्मचारियों की भूमिका

ग्राम सभा का आयोजन और प्रस्तावों का सही तरीके से लेखन तीन मुख्य स्तंभों पर टिका होता है:

1. सरपंच (ग्राम प्रधान) की भूमिका

  • अध्यक्षता: सरपंच ग्राम सभा की बैठक का मुख्य पीठासीन अधिकारी होता है। बैठक का संचालन और कानून व्यवस्था बनाए रखना सरपंच की जिम्मेदारी है।
  • प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण: गाँव की समस्याओं और विकास योजनाओं को जनता के सामने रखना और उस पर चर्चा करवाना।
  • हस्ताक्षर: बैठक समाप्त होने के बाद प्रस्ताव रजिस्टर (प्रारूप 3) पर सरपंच के हस्ताक्षर और पदमुहर अनिवार्य है।

2. ग्राम पंचायत सचिव (Secretary) की भूमिका

  • रिकॉर्ड की सुरक्षा: सचिव एक शासकीय कर्मचारी होता है। प्रस्ताव रजिस्टर को सुरक्षित रखना और कार्यवाही को हूबहू रजिस्टर में लिखना सचिव का मुख्य काम है।
  • एजेंडा तैयार करना: सरपंच के समन्वय से प्रारूप 1 और 2 तैयार करना।
  • दस्तावेजीकरण: बैठक में ग्रामीणों द्वारा उठाए गए मुद्दों और पारित प्रस्तावों को स्पष्ट अक्षरों में लिखना। सचिव के हस्ताक्षर के बिना प्रस्ताव को कानूनी मान्यता नहीं मिलती।

3. शासकीय कर्मचारियों (लाइन डिपार्टमेंट नोडल अधिकारी) की भूमिका

ग्राम सभा की बैठकों में विभिन्न विभागों के कर्मचारी (जैसे पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और तकनीकी इंजीनियर) उपस्थित रहते हैं।

  • पटवारी की भूमिका: भूमि संबंधी विवादों, नामांतरण और वंशावली के सत्यापन में तकनीकी इनपुट देना। (भूमि नामांतरण से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप हमारी दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं)।
  • योजनाओं की जानकारी: कृषि, स्वास्थ्य या महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी अपनी योजनाओं (जैसे- वृद्धावस्था पेंशन या मातृ वंदना योजना) के पात्र हितग्राहियों की सूची ग्राम सभा में अनुमोदन के लिए रखते हैं।

✍️ ग्राम सभा प्रस्ताव लिखने का सही तरीका (Step-by-Step)

यदि आप एक पंचायत प्रतिनिधि हैं या सजग नागरिक हैं, तो प्रस्ताव लिखते समय इन चरणों का पालन करें:

1.शीर्षक और मूल विवरण:प्रारूप 3 की शुरुआत.

रजिस्टर के पन्ने पर सबसे ऊपर बैठक का प्रकार (विशेष या सामान्य ग्राम सभा), दिनांक, दिन, समय और स्थान (जैसे- पंचायत भवन) स्पष्ट रूप से लिखें।

2.अध्यक्ष और अधिकारियों के नाम दर्ज करना:कोरम की पुष्टि.

बैठक किसकी अध्यक्षता में हो रही है (सरपंच का नाम) और कौन-कौन से शासकीय अधिकारी उपस्थित हैं, उनके नाम और पद का उल्लेख करें।

3.प्रस्ताव का मुख्य विवरण लिखना:एजेंडा अनुसार चर्चा.

प्रत्येक कार्य के लिए अलग प्रस्ताव नंबर डालें। जैसे- “प्रस्ताव क्र. 01: मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण कार्य की स्वीकृति।” इसके नीचे चर्चा का संक्षिप्त विवरण और सर्वसम्मति का निर्णय लिखें।

4.हस्ताक्षर और समापन:कानूनी वैधता.

कार्यवाही समाप्त होने के बाद, उपस्थित ग्रामीणों की संख्या लिखें और नीचे बाईं ओर सचिव तथा दाईं ओर सरपंच के हस्ताक्षर व मुहर लगवाकर रजिस्टर को क्लोज (बंद) करें, ताकि बाद में कोई बदलाव न किया जा सके।

⚠️ प्रस्ताव में हेरफेर या फर्जीवाड़ा होने पर क्या करें? (Grievance & Complaint)

कई बार ग्रामीणों की शिकायत होती है कि बैठक में चर्चा कुछ और हुई थी, लेकिन सरपंच और सचिव ने मिलीभगत करके प्रस्ताव रजिस्टर में कुछ और लिख दिया। ऐसी स्थिति में आपके पास निम्नलिखित कानूनी अधिकार हैं:

  1. सर्टिफाइड कॉपी की मांग: आप पंचायत राज अधिनियम के तहत मामूली शुल्क देकर सचिव से उस ग्राम सभा प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) मांग सकते हैं।
  2. उच्च अधिकारियों से शिकायत: यदि प्रस्ताव फर्जी है, तो गाँव के मतदाता सामूहिक रूप से हस्ताक्षर करके जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) या जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO)/कलेक्टर को लिखित शिकायत दे सकते हैं।
  3. जांच और निरस्तीकरण: शिकायत सही पाए जाने पर पंचायती राज नियमों के तहत उच्च अधिकारी उस फर्जी प्रस्ताव को निरस्त (Void) कर सकते हैं और दोषी पाए जाने पर सचिव को निलंबित व सरपंच को पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

🌐 महत्वपूर्ण आउटबाउंड लिंक्स (Official Government Outbound Links)

विभाग / पोर्टलकिस टेक्स्ट/सेक्शन पर लिंक करेंआधिकारिक आउटबाउंड लिंक (URL)
पंचायती राज मंत्रालय (MoPR)भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालयhttps://panchayat.gov.in
e-GramSwaraj Portalई-ग्राम स्वराज पोर्टल / ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP)https://egramswaraj.gov.in
मनरेगा (MGNREGA) आधिकारिक पोर्टलमनरेगा योजना / लेबर बजट प्रस्तावhttps://nrega.nic.in
प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G)पीएम आवास योजना / ग्राम सभा सूची चयनhttps://pmayg.nic.in
मध्य प्रदेश पंचायती राज (यदि MP केंद्रित है)पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (MP)https://prd.mp.gov.in
उत्तर प्रदेश पंचायती राज (यदि UP केंद्रित है)पंचायती राज विभाग उत्तर प्रदेशhttps://panchayatiraj.up.nic.in

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप 1, 2 और 3 क्या हैं?

ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप (Formats) वे सरकारी ढांचे हैं जिनका उपयोग गांव के विकास कार्यों, योजनाओं (जैसे मनरेगा, पीएम आवास) की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों को आधिकारिक रूप से दर्ज करने के लिए किया जाता है।
प्रारूप 1: विकास कार्यों और योजनाओं के नए प्रस्ताव तैयार करने के लिए।
प्रारूप 2: पूर्व स्वीकृत कार्यों की समीक्षा, बजट आवंटन या संशोधनों के लिए।
प्रारूप 3: विशेष मुद्दों, हितग्राही चयन, एनओसी (NOC) या विवाद निस्तारण संबंधी प्रस्तावों के लिए।

ग्राम सभा का प्रस्ताव कैसे लिखा जाता है?

ग्राम सभा प्रस्ताव लिखने के लिए सबसे पहले बैठक की तिथि, समय, स्थान, अध्यक्षता कर रहे सरपंच का नाम और कुल उपस्थित सदस्यों की संख्या दर्ज की जाती है। इसके बाद बैठक का मुख्य कार्यसूची (Agenda), चर्चा का विवरण, सर्वसम्मति या बहुमत से लिया गया निर्णय और अंत में सरपंच, सचिव व उपस्थित ग्रामीणों के हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान दर्ज किए जाते हैं।

ग्राम सभा में सरपंच की क्या भूमिका होती है?

सरपंच ग्राम सभा की बैठक बुलाने, उसकी अध्यक्षता करने और बैठक में शांति व अनुशासन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। सरपंच ग्राम सभा में पारित प्रस्तावों को निष्पादित कराने और गांव के विकास कार्यों की मंजूरी में मुख्य जन प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है।

ग्राम सभा प्रस्ताव में पंचायत सचिव (Panchayat Secretary) का क्या काम होता है?

पंचायत सचिव एक शासकीय कर्मचारी होता है। उसका मुख्य काम ग्राम सभा की बैठक का एजेंडा तैयार करना, कोरम (गणपूर्ति) की जांच करना, बैठक की कार्रवाई को ‘पंजी/रजिस्टर’ (Prosa Book) में दर्ज करना (Minuting), प्रस्ताव प्रारूप 1, 2, 3 को आधिकारिक रूप से भरना और पारित प्रस्तावों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना होता है।

ग्राम सभा की बैठक में शासकीय कर्मचारियों (जैसे पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जीआरएस) का क्या दायित्व है?

शासकीय कर्मचारी अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं की जानकारी ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। उदाहरण के लिए, पटवारी भूमि/राजस्व संबंधी जानकारी देता है, जीआरएस (GRS) मनरेगा का लेबर बजट पेश करता है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पोषण व स्वास्थ्य योजनाओं का ब्योरा देती है। वे प्रस्तावों के तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट करने में मदद करते हैं।

क्या ग्राम सभा के प्रस्ताव को निरस्त या बदला जा सकता है?

जी हां, यदि कोई प्रस्ताव नियमों के विरुद्ध या जनहित के खिलाफ पाया जाता है, तो आगामी ग्राम सभा में पुनः बहुमत से नया प्रस्ताव पारित करके पुराने प्रस्ताव को संशोधित या निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा सक्षम प्रशासनिक अधिकारी (जैसे जनपद सीईओ या कलेक्टर) भी अवैध प्रस्तावों पर रोक लगा सकते हैं।

ग्राम सभा का कोरम (Gana Poorti) पूरा न होने पर क्या होता है?

यदि तय समय पर कुल मतदाताओं का आवश्यक प्रतिशत (और महिला/एससी/एसटी सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति) पूरा नहीं होता है, तो सरपंच/सचिव बैठक को स्थगित कर देते हैं। इसके बाद अगली तिथि तय की जाती है, जिसमें कोरम की अनिवार्यता के नियमों में छूट रहती है।

क्या ग्राम सभा का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है?

जी हां, पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा को सर्वोच्च संस्था माना गया है। ग्राम सभा द्वारा नियमानुसार पारित प्रस्तावों और हितग्राही सूचियों को बिना ठोस कानूनी आधार के कोई भी विभागीय अधिकारी आसानी से खारिज नहीं कर सकता।

📝 निष्कर्ष और ज़रूरी सलाह (LocalYojana.com)

ग्राम सभा प्रस्ताव प्रारूप केवल सरकारी कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह गाँव के विकास का बजट और ग्रामीणों के अधिकारों का मुख्य आधार है। LocalYojana.com आपको सलाह देता है कि जब भी आपके गाँव में ग्राम सभा की बैठक हो, उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और प्रस्ताव रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करें कि जो निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है, वही कागजों पर दर्ज हुआ है या नहीं।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़ी ऐसी ही सटीक और व्यावहारिक जानकारियों के लिए LocalYojana.com के साथ जुड़े रहें।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी पंचायती राज व्यवस्था के सामान्य नियमों पर आधारित है। ग्राम सभा के आयोजन, कोरम के प्रतिशत, और प्रस्ताव प्रारूपों के नंबर या लेआउट अलग-अलग राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदि) के पंचायती राज अधिनियमों और समय-समय पर जारी संशोधनों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। किसी भी विशिष्ट कानूनी कार्रवाई या प्रारूप के लिए अपने स्थानीय जनपद/ब्लॉक कार्यालय या आधिकारिक राज्य पंचायती राज पोर्टल से नियमों की पुष्टि अवश्य कर लें।

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